अमेरिका और रूस की न्यूक्लियर आक्रामकता से वैश्विक शांति संधियां कमजोर होंगी। भारत जैसे तटस्थ देशों के लिए यह चुनौती है, क्योंकि रूस प्रमुख रक्षा साझेदार है। यदि वाकई परमाणु परीक्षण होते हैं, तो इन हथियारों की नई होड़ में चीन, उत्तर कोरिया और ईरान भी शामिल हो सकते हैं। कैरेबियन में टकराव से तेल कीमतें चढ़ सकती हैं।
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